Bangal (7)

कोलकाता: रसगुल्ला को लेकर कोलकाता और उड़ीसा के बीच जारी जंग अब खत्म हो गयी. दोनों राज्यों की दलीलें सुनने के बाद उड़ीसा सरकार के दावों को खारिज करते हुए बंगाल सरकार को रसगुल्ला का जीआइ टैग दे दिया गया. रसगुल्ला पर पश्चिम बंगाल और उड़ीसा दोनों ने दावा किया था. रसगुल्ला पर भौगोलिक संकेत (जीआइ टैग) के साल्टलेक स्थित पेटेंट्स डिजाइंस एंड ट्रेडमार्क्स के कार्यालय में पेटेंट्स डिजाइंस एंड ट्रेडमार्क्स के कंट्रोलर जनरल ओपी गुप्ता के नेतृत्व में 10 सदस्यीय टीम के समक्ष बंगाल सरकार के विभिन्न विभाग के प्रतिनिधियों, पश्चिम बंगाल मिष्ठान व्यवसायी समिति के पदाधिकारियों, रसगुल्ला का अविष्कार करने का दावा करने वाले केसी दास के संस्थापक नवीनचंद्र दास के वंशज धीमान चंद्रदास व अन्य ने अपना पक्ष रखा था. उल्लेखनीय है कि बंगाल सरकार ने रसगुल्ला पर अपना दावा करते हुए भौगोलिक संकेत (GI टैग) के लिए कोर्ट में अपील की थी. राज्य सरकार के विज्ञान एवं तकनीक विभाग की नोडल ऑफिसर महुआ होम चौधरी ने बताया कि रसगुल्ला का उद्भव स्थान बंगाल ही है. यह साबित करने के लिए राज्य सरकार ने कई दस्तावेज भी प्रस्तुत किये. रसगुल्ला का उल्लेख कृष्णदेव कविराज की चैतन्य चरितामृत में मिलता है और कई बार मिलता है. इस पर पेटेंट के अधिकारियों ने सवाल किया कि जिस समय चैतन्य चरितामृत लिखा गया था उस समय बिहार, बंगाल और उड़ीसा एक राज्य ही था. ऐसी स्थिति में रसगुल्ला बंगाल का कैसे हुआ. रसगुल्ला बंगाल का है, इसे साबित करने के लिए वीडियो भी पेश किया गया. साथ ही यह बताया गया है कि यह मिठाई छेने से बनती है और छेना बंगाल का ही उत्पाद है. उड़ीसा के रसगुल्ला में इस्तेमाल होने वाला रस या बंगाल के रसगुल्ला में इस्तेमाल होने वाला रस व स्पंज अलग-अलग हैं. इनका घनत्व भी अलग है. बांग्ला मिष्ठान व्यवसायी समिति के महासचिव रवींद्र कुमार पॉल ने कहा कि हम लोग पूरी तरह से आश्वस्त हैं कि रसगुल्ला का पहला आविष्कार बंगाल में ही हुआ. चैतन्य महाप्रभु का आविर्भाव 530 वर्ष पहले हुआ था और उस समय रसगुल्ला का उल्लेख है. धीमान चंद्र दास ने कहा कि हमारा 60 फीसदी काम पूरा हो गया है. अब केवल तकनीकी सूचनाएं ही उपलब्ध करानी है. बंगाल का रसगुल्ला और उड़ीसा का रसगुल्ला दोनों ही अलग-अलग हैं. उधर, राज्य सरकार ने अपनी पूरी ताकत लगा दी थी. पश्चिम बंगाल को रसगुल्ला पर जीआई टैग मिल जाये, ताकि वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार में इनका इस्तेमाल कर सके. साथ ही बंगाल ने रसगुल्ला के अलावा चावल की दो प्रजातियां गोविंदभोग और तुलाईपंजी पर भी जीआई टैग के लिए अपील की है.

Submit to DeliciousSubmit to DiggSubmit to FacebookSubmit to Google PlusSubmit to StumbleuponSubmit to TechnoratiSubmit to TwitterSubmit to LinkedIn

दार्जिलिंग: दार्जिलिंग हिल्स में लगातार 29 दिन से जारी बेमियादी बंद के बीच गोरखालैंड टेरीटोरियल प्रशासन (जीटीए) के दफ्तर, एक रेलवे स्टेशन और जंगल में बने एक बंगले को आग के हवाले कर दिया गया जबकि कई गाड़ियों को नुकसान पहुंचाया गया. हिल्स में हिंसा और आगजनी के बीच दार्जिलिंग, कलिंपोंग और सोनादा में थलसेना की तीन टुकडिय़ां तैनात की गई हैं. अर्द्धसैनिक और पुलिस बलों ने सड़कों पर गश्त की और कड़ी चौकसी बरती. सैकड़ों प्रदर्शनकारियों ने नेपाली भाषा के जानेमाने कवि भानु भक्त आचार्य की कविता का पाठ करते हुए रंगारंग रैलियां निकालीं और उन्होंने अपने हाथों में अलग गोरखालैंड राज्य के समर्थन वाली तख्तियां भी ले रखी थीं. गोरखा जनमुक्ति मोर्चा (जीजेएम) और हिल्स की अन्य पार्टियों ने आज भानु भक्त आचार्य की जयंती भी मनाई. हिल्स में लगातार 26 दिन से इंटरनेट सेवाएं बाधित हैं. दवा की दुकानें छोड़कर बाकी सारी दुकानें और दफ्तर बंद हैं. आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि दार्जिलिंग के मॉल रोड के चौरास्ता स्थित जीटीए के यात्रा एवं पर्यटन कार्यालय को गोरखालैंड समर्थकों ने आज सुबह आग के हवाले कर दिया. कल रात दार्जिलिंग स्टेशन के पास कुछ अज्ञात लोगों ने कई सरकारी गाडयिों को भी नुकसान पहुंचाया. कर्सियांग के गयाबारी इलाके में आज सुबह एक रेलवे स्टेशन को भी गोरखालैंड समर्थकों ने आग लगा दी. तीस्ता नदी के पास के जंगल में बने एक बंगले को भी आज आग लगा दी गई. इस बीच, गोरखालैंड आंदोलन समन्वय समिति (जीएमसीसी) के आह्वान पर प्रतिक्रिया जाहिर करते हुए एक लेखक और एक गायक ने राज्य सरकार की आेर से उन्हें दिए गए अवॉर्ड वापस कर दिए.

Submit to DeliciousSubmit to DiggSubmit to FacebookSubmit to Google PlusSubmit to StumbleuponSubmit to TechnoratiSubmit to TwitterSubmit to LinkedIn

सिलीगुड़ी: गोरखा जनमुक्ति मोरचा (गोजमुमो) का गोरखालैंड आंदोलन बुधवार को एकबार फिर कालिंपोंग में हिंसक हो उठा. मोरचा का युवा विंग के बैनर तले शहर में एक विशाल रैली निकाली गयी. आंदोलनकारियों ने तृणमूल कांग्रेस (तृकां) के दफ्तर और राज्य सरकार द्वारा संचालित उत्तर बंगाल राजकीय परिवहन निगम (एनबीएसटीसी) के दफ्तर को फूंक डाला.सूचना पाते ही दमकल की गाड़ी मौके पर पहुंची और आगजनी को बुझाने का काफी प्रयास किया. लेकिन दोनों दफ्तर जल कर खाक हो गये. हालांकि इस आगजनी में किसी के हताहत होने की पुष्टि नहीं हुई है. वहीं, कालिम्पोंग पर मोरचा आंदोलनकारियों ने पुलिस और केंद्रीय वाहिनी सीआरपीएफ के जवानों पर जमकर पथराव भी किया. पुलिस और केंद्रीय वाहिनी को आंदोलनकारियों को तितर-बितर करने के लिए कई राउंड हवाई फायरिंग करनी पड़ी और आंसू गैस के गोले दागने पड़े. आंदोलनकारियों के इस पथराव में तीन पुलिस के जवानों के जख्मी होने की पुष्टि हुई है. तीनों का इलाज दार्जिलिंग सदर अस्पताल में चल रहा है. वहीं, आगजनी में संपत्ति के भारी नुकसान की खबर है. खबर लिखे जाने तक कालिम्पोंग में स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है. हालात पर कड़ी नजर रखने के लिए कालिम्पोंग पुलिस और केंद्रीय वाहिनी लगातार संयुक्त रूप से पूरे शहर में गश्त लगा रही है.

Submit to DeliciousSubmit to DiggSubmit to FacebookSubmit to Google PlusSubmit to StumbleuponSubmit to TechnoratiSubmit to TwitterSubmit to LinkedIn

दार्जीलिंग. भाषा विवाद और अलग गोरखालैंड राज्य की मांग को लेकर गोरखा जनमुक्ति मोरचा के आंदोलन से दार्जीलिंग पर्वतीय क्षेत्र में पैदा हुए हालात से केंद्र चिंतित है. पश्चिम बंगाल पुलिस से केंद्र सरकार ने रिपोर्ट तलब की है. यही नहीं, स्थिति से निपटने के िलए गृह मंत्रालय ने दार्जीलिंग पर्वतीय क्षेत्र के लिए सीआरपीएफ की दस कंपनियां भेजी है. इसमें अर्द्धसैनिक बल की दो महिला कंपनी भी शामिल है. उधर, गोजमुमो के सरकारी कार्यालय बंद के एलान के दूसरे दिन भी सामान्य जनजीवन पर असर पड़ा. मंगलवार को चाय श्रमिकों की भी हड़ताल थी, जिसे गोजमुमो ने समर्थन दिया था. चौक बाजार इलाके में गोजमुमो समर्थकों और पुलिस में भिड़ंत हो गयी.पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज कर दिया. एक मोरचा समर्थक को गिरफ्तार किया गया.केंद्र सरकार ने दार्जीलिंग में जारी हिंसा पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि सरकार नागरिक सुरक्षा और कानून व्यवस्था के हालात पर नजर रखे हुए है. गृह मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा कि केंद्र सरकार दार्जीलिंग जिले में हिंसा से निपटने और सामान्य हालात बहाल करने के लिए राज्य सरकार को हरसंभव सहयोग मुहैया कराने को तैयार है. हालांकि गृह मंत्रालय को अभी तक राज्य सरकार से मौजूदा हालात को लेकर रिपोर्ट का इंतजार है. नेताजी सुभाष चंद्र बोस के परपौत्र चंद्र कुमार बोस ने गोरखाओं के आंदोलन का समर्थन किया है. उनका कहना है कि गोरखाओं को उनका अधिकार मिलना चाहिए, उन्होंने नेताजी के साथ मिलकर आजादी की लड़ाई में संघर्ष किया था. गौरतलब है कि गोरखालैंड जनमुक्ति मोरचा ने अलग गोरखालैंड राज्य की मांग को लेकर सोमवार से अनिश्चितकालीन सरकारी कार्यालय बंद का ऐलान किया है.बंद के दौरान उत्तर बंगाल के आइजी तथा एडीजी एन रमेश बाबू ने विभिन्न इलाकों का दौरा किया है. कालिम्पोंग में संवाददाताओं से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि पहाड़ में पूरी तरह से शांति है. बंद के दौरान कहीं से भी कोई अप्रिय घटना नहीं घटी है. पूरे पहाड़ पर सुरक्षा के तगड़े इंतजाम किये गये हैं. पहाड़ पर हिंसा और तनाव के बीच तृणमूल कांग्रेस को तगड़ा झटका लगा है. कालिम्पोंग नगरपालिका के पूर्व अध्यक्ष सीके कुमायी ने तृणमूल कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया है. उन्होंने अपने इस्तीफे में कहा है कि राज्य सरकार की गलत नीतियों की वजह से पहाड़ की स्थिति खराब हुई है.स्थानीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार मुंबई से कुछ पर्यटक दार्जिलिंग घुमने आये थे. जब वह लोग सिलीगुड़ी से दार्जिलिंग जा रहे थे, तो कर्सियांग के निकट पिकेटिंग कर रहे गोजमुमो समर्थकों ने उनकी गाड़ी रोकी और पर्यटकों के साथ मारपीट करने लगे. पेट्रोलिंग कर रही पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित किया. पुलिस ने कड़ी सुरक्षा के बीच पर्यटकों को दार्जिलिंग पहुंचाया.

Submit to DeliciousSubmit to DiggSubmit to FacebookSubmit to Google PlusSubmit to StumbleuponSubmit to TechnoratiSubmit to TwitterSubmit to LinkedIn

सिलीगुड़ी: अलग राज्य गोरखालैंड नहीं मिलने तक लगातार आंदोलन का एलान गोरखा जन मुक्ति मोरचा (गोजमुमो) ने कर दिया है. सोमवार से राज्य व केंद्र सरकार के सभी कार्यालयों को बंद कराये जाने की घोषणा की गयी है. इसी क्रम में पर्यटकों को पहाड़ छोड़ने की सलाह दी गयी है. गोजमुमो की ओर से कहा गया है कि पर्यटक पहाड़ छोड़ कर समतल में उतर जायें, क्योंकि आगामी दिनों में आंदोलन की वजह से हालात और बिगड़ने वाले हैं. गोजमुमो की इस चेतावनी से अंदाजा लगाया जा रहा है कि गोरखालैंड आंदोलन का पूरा रोडमैप तैयार हो चुका है. दूसरी तरफ पहाड़ पर पर्यटकों की परेशानी खत्म होने का नाम नहीं ले रही है. उन्हें नकदी के लिए भटकना पड़ रहा है. पहाड़ के अधिकतर एटीएम में रुपये खत्म हो चुके हैं. गत 8जून को हुई हिंसा के बाद जो पर्यटक पहाड़ छोड़ना चाहते थे, उन्हें एनबीएसटीसी की बसों का उपयोग कर राज्य सरकार ने समतल तक सुरक्षित पहुंचा दिया है. लेकिन अब भी बड़ी संख्या में पर्यटक दार्जीलिंग पर्वतीय क्षेत्र में मौजूद हैं. ऐसे पर्यटकों को गोजमुमो ने नीचे चले जाने की सलाह दी है. पहाड़ की मौजूदा हालात की वजह से पर्यटन व्यवसाय को काफी नुकसान होगा. ईस्टर्न हिमालया ट्रेवल्स एंड टूर ऑपरेटर्स एसोसिएशन के सम्राट सान्याल ने बताया कि इस सीजन में रिकॉर्ड तोड़ पर्यटक पहाड़ पर आये. ग्रीष्मावकाश का सीजन चल रहा है, जबकि पूजा का सीजन अभी बाकी है.

Submit to DeliciousSubmit to DiggSubmit to FacebookSubmit to Google PlusSubmit to StumbleuponSubmit to TechnoratiSubmit to TwitterSubmit to LinkedIn

दार्जिलिंग:पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पहली कैबिनेट बैठक के आयोजन स्थल के पास गोरखा जनमुक्ति मोर्चा (जीजेएम) के कार्यकर्ताओं ने पुलिस के चार वाहनों को आग लगा दी और सुरक्षा बलों पर पथराव किया जिन्हें रोकने के लिए पुलिस को लाठी चार्ज करना पड़ा एवं स्थिति नियंत्रण में नहीं आने पर आंसू गैस के गोले भी दागने पड़ें.ममता बनर्जी पहली बार कोलकाता से बाहर कैबिनेट की बैठक कर रही हैं. जीजेएम के कार्यकर्ताओं ने चौरास्ता के पास भानु भवन के नजदीक हिंसक प्रदर्शन किया और पुलिस के चार वाहनों को आग लगा दी. प्रदर्शनकारियों ने वहां लगे बैरिकेड तोड़कर राजभवन की ओर बढऩे का प्रयास किया जहां मुख्यमंत्री , सभी कैबिनेट मंत्री और शीर्ष आईएएस एवं आईपीएस अधिकारी मौजूद हैं.प्रदर्शनकारी दोपहर बाद साढ़े 12 बजे से धरने पर बैठे थे. इसके बाद वे राजभवन की ओर बढऩे लगे जिस पर पुलिस ने उन्हें रोकने का प्रयास किया. प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर पथराव करना शुरू कर दिया जिन्हें काबू में करने के लिए पुलिस को लाठी चार्ज करना पड़ा. इसके बाद भी जब प्रदर्शनकारी नहीं माने तो पुलिस को आंसू गैस के गोले दागने पड़ें. पुलिस ने सुरक्षा के लिहाज से राजभवन को चारों ओर से घेर लिया है. झड़पों के कारण पर्यटक भी बाहर नजर नहीं आए. घटना की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय चैनलों के प्रसारण पर रोक लगा दी गई है.

Submit to DeliciousSubmit to DiggSubmit to FacebookSubmit to Google PlusSubmit to StumbleuponSubmit to TechnoratiSubmit to TwitterSubmit to LinkedIn

नई दिल्ली : नोटबंदी पर केंद्र सरकार को घेरने में जुटी पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी अपनी पार्टी के सांसद सुदीप बंदोपाध्याय की गिरफ्तारी के बाद से भड़की हुई हैं. पश्चिम बंगाल में जगह-जगह बीजेपी के कार्यालयों पर हमले हुए हैं तो ये दंगल दिल्ली तक पहुंच गया है. टीएमसी का आरोप है कि केंद्र की सरकार सीबीआई की गलत इस्तेमाल कर रही है और चिटफंड केस में पार्टी के नेताओं के फंसाने में लगी हुई है.

 

 

 

बाबुल सुप्रियो के घर पर प्रदर्शन

 

सुदीप बंदोपाध्याय की गिरफ्तारी के विरोध में टीएमसी ने राजधानी कोलकाता सहित राज्य के विभिन्न जगहों पर विरोध रैली निकाली. इस दौरान कोलकाता में बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष की कार पर हमला किया, वहीं केंद्रीय मंत्री बाबुल सुप्रियो का कोलकाता स्थित घर भी प्रदर्शनकारियों के गुस्से का शिकार हुआ. बाबुल सुप्रियो ने घटना पर ट्वीट करते हुए कहा कि टीएमसी गुंडों ने मेरे अपार्टमेंट के गेट को तोड़ने की कोशिश की. यहां मेरे माता-पिता रहते हैं. नारेबाजी हो रही है. ये शर्म की बात है. इस घटना के लिए उन्होंने कोलकाता पुलिस को भी जिम्मेदार ठहराया.

 

बीजेपी दफ्तरों पर हमले

 

इस बीच पश्चिम बंगाल में बीजेपी के कई दफ्तरों पर भी हमले की खबर है. बीजेपी के प्रदेश मुख्यालय पर भी कथित टीएमसी कार्यकर्ताओं ने पथराव किया, जिसमें कई लोग घायल हो गए. इन हमलों के बाद बीजेपी कार्यालय के बाहर सीआरपीएफ को तैनात किया गया है.

 

 

 

गृह मंत्रालय ने जताई चिंता

 

रोज वैली चिटफंड घोटाले में पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस के सांसद सुदीप बंदोपाध्याय की गिरफ्तारी के विरोध में टीएमसी कार्यकर्ता के हिंसक प्रदर्शन पर गृह मंत्रालय ने चिंता जताई है. गृह मंत्रालय से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, इन हिंसक घटनाओं को लेकर मंत्रालय काफी गंभीर है और उसने राज्य सरकार से वहां के कानून व्यवस्था की जानकारी ली.

 

 

 

पीएम के खिलाफ नारेबाजी

 

बुधवार को टीएमसी कार्यकर्ताओं ने कोलकाता में प्रोटेस्ट रैली निकाली. टीएमसी केंद्र की मोदी सरकार पर बदले की कार्यवाही के तहत काम करने का आरोप लगा रही है. कोलकाता की सड़कों पर टीएमसी कार्यकर्ताओं ने पीएम मोदी और बीजेपी के खिलाफ नारे लगाए.

 

 

 

दिल्ली पहुंचा दंगल

 

सुदीप बंदोपाध्याय की गिरफ्तारी के विरोध में प्रधानमंत्री निवास के बाहर धरना देने जा रहे टीएमसी सांसदों को दिल्ली पुलिस ने डिटेन करके बस में डाला और तुगलक रोड थाने ले कर चली गई. तृणमूल कांग्रेस के सांसदों का कहना था कि मोदी को हटाना चाहिए तभी देश बचेगा.

 

 

 

सीबीआई के खिलाफ शिकायत दर्ज

 

रोजवैली चिटफंड मामले में गिरफ्तार टीएमसी के सांसद सुदीप बंदोपाध्याय की पत्नी ने सीबीआई के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है. सीबीआई पर सुदीप बंदोपाध्याय को जान से मारने की कोशिश की शिकायत दर्ज कराई गई है. सुदीप बंदोपाध्याय की पत्नी ने बिधाननगर थाने में ये शिकायत दर्ज कराई है. बुधवार को सीबीआई ने पूछताछ के बाद सुदीप बंदोपाध्याय को गिरफ्तार कर लिया था.

 

बदले की राजनीति का आरोप

 

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इसे नोटबंदी के खिलाफ पार्टी के अभियान पर बदले की कार्रवाई बताया है. ममता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह पर जमकर हमला किया. यहां तक कि 2002 के गुजरात दंगों के लिए उनकी गिरफ्तारी की भी मांग की. ममता बनर्जी ने मोदी सरकार के खिलाफ राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शन की घोषणा की है और कहा है कि हिम्मत है तो उन्हें गिरफ्तार करें.

 

 

 

तपस पाल की हुई थी गिरफ्तारी

 

रोज वैली घोटाले में गिरफ्तार होने वाले सुदीप बंदोपाध्याय, सांसद तापस पाल के बाद दूसरे टीएमसी सांसद हैं. सीबीआई तापस पाल और सुदीप बंदोपाध्याय से आमने-सामने पूछताछ कर सकती है. दोनों को रोज वैली के कई जगहों पर भी ले जाने की तैयारी है.

 

 

 

क्या है रोजवैली घोटाला

 

पश्चिम बंगाल में जब अप्रैल 2013 में 2500 करोड़ का सारदा चिटफंड घोटाला सामने आया था तब इतनी बड़ी हेरी-फेरी ने सबको भौचक्का कर दिया था. इसके अलावा 3500 करोड़ रुपये के बेसिल इंटरनेशनल लिमिटेड चिटफंड घोटाले ने भी सबके होश उड़ा दिए थे. लेकिन, रोजवैली घोटाला कोई 5 या 10 हजार करोड़ का नहीं बल्कि 17,000 करोड़ रुपये का है. यह सारदा घोटाले से सात गुना ज्यादा है. कॉरपोरेट जगत से लेकर राजनेताओं की मिलीभगत से 10 राज्यों में चल रहे इस घोटाले ने लोगों को करोड़ों रुपयों का चूना लगा दिया गया. सीबीआई की ओर से दाखिल की गई चार्जशीट में कहा गया था कि कंपनी ने निवेशकों के 17 हजार करोड़ रुपये डुबो दिए. रोज वैली कंपनी ओडिशा में सक्रिय थी और यहां के लोगों के 450 करोड़ रुपये डूब गए.

 

 

 

दस राज्यों तक फैला था साम्राज्य

 

रोजवैली कंपनी पर आरोप है उसने सेबी की अनुमति के बिना 2011 से 2013 के बीच अवैध तरीके से लोगों से पैसा इकट्ठा किया. उसने लोगों को कहीं ज्यादा रिटर्न देने का वादा किया था. रोजवैली घोटाले के इतने व्यापक होने की एक और वजह भी है. रोजवैली ग्रुप के चैयरमैन गौतम कुंडु का करोबार बंगाल सहित कम से कम 10 राज्यों में फैला हुआ था. इस ग्रुप ने 90 के दशक में अंतिम वर्षों में होटल कारोबार से शुरुआत की थी.

Submit to DeliciousSubmit to DiggSubmit to FacebookSubmit to Google PlusSubmit to StumbleuponSubmit to TechnoratiSubmit to TwitterSubmit to LinkedIn

फोटो गैलरी

Rashtra Samvad FB

एडिटर ओपेनियन

IPL की साख पर सवाल गलत: श्रीनिवासन

IPL की साख पर स...

नई दिल्ली।। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड...

अरुणाचल की तीरंदाजों को चीन ने दिया नत्थी वीजा!

अरुणाचल की तीरं...

नई दिल्ली।। अरुणाचल प्रदेश की दो नाबालिग...

Video of the Day

Right Advt

Contact Us

      • Address: 66, Golmuri Bazar, Jamshedpur-831003, Jharkhand
      • Tel: 0657-2341060 Mbl: 09431179542, 09334823893
      • Email:  This email address is being protected from spambots. You need JavaScript enabled to view it.
      • Website: http://rashtrasamvadgroup.com/

About Us

Rashtrasamvad is one of the renowned Hindi Magazine in print and web media. It has earned appreciation from various eminent media personalities and readers. ‘Rashtrasamvad’ is founded by Mr. Devanand Singh.