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क्या पूर्वांचल के लोग धोखेबाज है ?

Written by  Published in Opinion Thursday, 03 August 2017 07:30

राजीव रंजन राय
सन 1990 के बाद उत्तर प्रदेश और बिहार से भारी संख्या में लोग रोजगार की तलाश में दिल्ली आए,विभिन्न क्षेत्रों में स्थानीय संगठनों के माध्यम से अपने आप को संगठित किया,पूर्वांचली संगठनों के सांस्कृतिक कार्यक्रमों में उमड़ने वाली भीड़ ने राजनीतिक दलों को प्रेरित किया उनको अपनी तरफ आकर्षित करने के लिए, भाजपा ने पूर्वांचल प्रकोष्ठ के द्वारा और कांग्रेस ने पूर्वांचल सेल के द्वारा उन को अपने अपने साथ जोड़ने का प्रयास किया,कांग्रेस में महाबल मिश्रा के रूप में पूर्वांचल का एक नेता कद्दावर बना तो भाजपा में लाल बिहारी तिवारी पूर्वांचल के बड़े नेता के रूप में स्थापित हुए,कालांतर में महाबल मिश्रा व्यक्तिगत तो मजबूत हुए पर संगठन के स्तर पर कांग्रेस में पूर्वांचल की भागीदारी कम होती गई,इसके उलट भाजपा में लाल बिहारी तिवारी कमजोर हुए लेकिन संगठन स्तर पर भाजपा में पूर्वांचल मजबूत होता चला गया,डॉक्टर हर्षवर्धन, विजेंद्र गुप्ता,विजय गोयल जैसे दिल्ली प्रदेश भाजपा अध्यक्षों ने पूर्वांचल के लोगों के महत्व को समझ कर उनको उचित मान सम्मान प्रदान किया, 2007 में डॉक्टर हर्षवर्धन प्रदेश अध्यक्ष थे तो उन्होंने दिल्ली नगर निगम चुनाव में पूर्वांचल के 34-35 लोगों को टिकट दी थी, विजेंद्र गुप्ता जो पार्टी अध्यक्ष हुए तो उन्होंने पूर्वांचल प्रकोष्ठ का दायित्व एडवोकेट अभय वर्मा को सौंपा और वहां से जो पूर्वांचल की गाड़ी चली उसको पकड़ना यहां के स्थानीय नेताओं को मुश्किल नजर आने लगा,विजय गोयल जब प्रदेश अध्यक्ष हुए तब पूर्वांचल के उत्साही अध्यक्ष विजय भगत जी को यह सौभाग्य प्राप्त हुआ कि उनके नेतृत्व मे पूर्वांचल प्रकोष्ठ से पूर्वांचल मोर्चा बना और वह उस के प्रथम अध्यक्ष बने,सतीश उपाध्याय के समय दिनेश प्रताप सिंह के नेतृत्व में पूर्वांचल मोर्चा ने अपना स्वर्णकाल देखा,वर्तमान परिदृश्य निराशाजनक लग रहा है,विगत 6 महीनों से पूर्वांचल उपेक्षित महसूस कर रहा है,वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष पूर्वांचली होने के बावजूद पूर्वांचल के तपे तपाये कार्यकर्ताओं को उपेक्षित किया जा रहा है ऐसे समय में याद आती है डॉक्टर हर्षवर्धन,विजेंद्र गुप्ता,विजय गोयल और सतीश उपाध्याय जैसे नेतृत्व की जिन लोगों ने पूर्वांचल को मान सम्मान और पहचान सब प्रदान किया,क्या पूर्वांचल के लोग इन लोगों को भूल जाएंगे वह भी ऐसे व्यक्ति के लिए जिसने कभी पूर्वांचल की लड़ाई लड़ी ही नहीं ?

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